ऐसे समय में भूलकर भी नहीं मांगनी चाहिए सगे-संबंधियों की मदद, होते है रिश्ते खराब - News Vision

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ऐसे समय में भूलकर भी नहीं मांगनी चाहिए सगे-संबंधियों की मदद, होते है रिश्ते खराब

ऐसे समय में भूलकर भी नहीं मांगनी चाहिए सगे-संबंधियों की मदद, होते है रिश्ते खराब

#In such a time, one should not seek help from relatives even by mistake, relationships get spoiled

चाणक्य नीति : आचार्य चाणक्य एक ऐसे विद्वान रहे हैं जिन्हें लगभग हर विषय के बारे में जानकारी थी और उन्होंने सभी विषयों का गहन अध्ययन किया था. अपने जीवन में मिले कटु अनुभवों का एक संग्रह तैयार किया जिसे चाणक्य नीति नाम दिया. चाणक्य नीति में कई ऐसी नीतियों व बातों का जिक्र किया गया है जिन्हें अपनाकर व्यक्ति जीवन के हर मोड़ पर सफलता हासिल कर सकता है. इतना ही नहीं, कई बार जीवन में ऐसे मोड़ आते हैं जब आपको कई ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं जो कि मुश्किल में डाल सकते हैं. लेकिन चाणक्य के अनुसार एक समय ऐसा होता है जब आपको भूलकर भी सगे-संबंधियों की मदद नहीं लेनी चाहिए

आचार्य चाणक्य की इस बात का रखें ध्यान

आचार्य चाणक्य का कहना है कि अगर जीवन में कभी भी धन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़े तो कोशिश करें कि भूलकर भी अपने सगे संबंधियों से कोई मदद न लें

‘वरं वनं व्याघ्रगजेन्द्रसेवितं द्रुमालयः पत्रफलाम्बु सेवनम्। तृणेशु शय्या शतजीर्णवल्कलं न बन्धुमध्ये धनहीनजीवनम्॥’

चाणक्य नीति के इस श्लोक का मतलब है कि व्यक्ति बाघ, हाथी और शेय जैसे भयंकर जीवों के साथ वन में रहते हुए फल और पत्ते खाकर अपना जीवन गुजार सकता है. लेकिन धनहीन होने पर भी अपने सगे संबंधियों के साथ न रहे और न ही उनसे कोई मदद लें. ऐसा करना दुखदायी हो सकता है

आचार्य चाणक्य के अनुसार शारीरिक और मानसिक पीड़ा को सामना दूसरों की मदद से किया जा सकता है. लेकिन आर्थिक संकट के समय अपनों की मदद लेना बाद में बहुत ही पीड़ादायक होता है. क्योंकि एक बार रिश्तेदारों से मदद लेना आपको जिंदगीभर अहसास तले दबा देता है. इ​सलिए कोशिश करें कि आर्थिक संकट के समय कम में गुजारा हो और किसी की मदद न लेनी पड़े. यदि फिर भी मदद की जरूरत पड़े तो रिश्तेदारों की बजाय किसी दोस्त से मदद लेना फिर भी बेहतर होता है

सगे संबंधी आपको धनहीन होने पर सहारा तो दे देंगे लेकिन जिंदगीभर उस अहसान का ताना आपको मिलता रहेगा. जिसकी वजह से रिश्तों में दरार पड़ जाती है और एक बार रिश्तों में दरार आ जाए तो चाहकर भी उसे दूर नहीं किया जा सकता. रिश्तेदारों से पैसे की मदद लेना आपको कठिनाइयों में डाल सकता है. इसलिए अपनी जरूरतें कम से कम रखें और आर्थिक संकट के समय परिवार के सहयोग से उभरने की कोशिश करें

Disclamire : ( यहाँ दी गई जानकारी सामान्य जानकारियों पर आधारित है हम इसकी पुष्टि नही करते है )

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